भारत में जल संकट | Water Crisis In India in hindi

ByShubham Maurya

Aug 24, 2022
water crisis in india

भारत के कुछ हिस्सों में भूमिगत जल का स्तर लगातार गिरता जा रहा है क्योंकि ताजे पानी की बढ़ती मांग, वर्षा की अनियमितता, बढ़ती जनसंख्या और औद्योगीकरण, शहरीकरण तथा जल प्रदूषण के कारण भारत में हर साल 122-194 बिलियन मीटर क्यूब भूमिगत जल कम होता जा रहा है, जिससे भारत में जल संकट पैदा हो गया है।

भारत में भू-जल की वर्तमान स्थिति :

भारत जो कि एक कृषि प्रधान देश है जहाँ पर अधिकतर फसलों की बुवाई के लिए पानी का इस्तेमाल किया जाता है और यहां की जलवायु मानसूनी जलवायु है, जिसके कारण भारत अपने अधिकतर फसलों की सिंचाई के लिए मानसून पर निर्भर करता करता है। जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून के पैटर्न में जो बदलाव देखा जा रहा है उसका असर हमारी कृषि व्यवस्था पर भी पड़ रहा है और अनियमित वर्षा के कारण कहीं सूखा, कहीं बाढ़ का संकट बना हुआ है, जिससे भी भारत में जल संकट पैदा हो गया है।

सेंट्रल ग्राउंड वॉटर बोर्ड (CGWB) के अनुसार भारत में हर साल 230 बिलीयन मीटर क्यूब भूमिगत जल का उपयोग कृषि सिंचाई के लिए किया जाता है और जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ मानव द्वारा किये गए हस्तक्षेप के कारण वाटर साइकिल टेबल के रिचार्ज ना हो पाने के कारण देश के कई हिस्सों में भूमिगत जल में कमी हो रही है, जो की बहुत ही चिंता का विषय है, भूमिगत जल से निकाले गए पानी का 89% पर्सेंट कृषि सिंचाई , 9% घरेलू उपयोग, 2% इंडस्ट्रियल प्रयोग के लिए उपयोग किया जाता है तथा 50% शहरों की जल आपूर्ति तथा 85% ग्रामीण जल की आवश्यकता को भूमिगत जल से पूरा किया जाता है।
धान की खेती जो पूरे भारत में की जाती है सबसे ज्यादा भूमिगत जल का इस्तेमाल इसी फसल के लिए किया जाता है, भारत में लगभग 54% क्षेत्र में हाई से एक्सट्रीमली हाई जल संकट देखा जा रहा है, ऐसा वाटर साइकिल टेबल के रिचार्ज ना होने पर भारत में जल संकट उत्पन्न हो रहा है।

भारत जिसके पास पूरे विश्व की 18 परसेंट पापुलेशन है तथा पूरे विश्व के केवल चार परसेंट वाटर सोर्स ही भारत में है। भारत में आने वाले समय में भूमिगत जल का बहुत बड़ा संकट उत्पन्न हो सकता है क्योंकि भारत का 70% जल प्रदूषित है तथा 75% घरो को पीने का पानी उपलब्ध ही नहीं है, 84% गांव के पास पाइप द्वारा पानी की पहुंच ही नहीं है- यह नीति आयोग की एक रिपोर्ट में बताया गया है। भारत में जल प्रदूषण लगातार बढ़ता ही जा रहा है, भूमिगत जल में कई भारी धातु के कण पाए गए है, जो लगातार जल को प्रदूषित कर रहे है। भारत जो 122 देशों में वाटर क्वालिटी इंडेक्स में 120 नंबर पर है, जो सोचने पर मजबूर कर रहा है कि भारत की स्थिति पानी की गुणवत्ता में बहुत ही खराब है।

पृथ्वी पर पानी के स्रोत क्या है ?

पूरी पृथ्वी पर लगभग 2.5% फ्रेश वाटर है, 0.9% लवणीय जल है तथा बाकि का बचा 96.5% समुद्री जल है। फ्रेश वाटर के स्रोत के रूप में पीने योग्य पानी जो कि पृथ्वी की ऊपरी सतह पर पाया जाता है, जैसे- झील, तालाब आदि वह 1.2% है तथा 30.1% भूमिगत जल है बाकी 68.7% ग्लेशियर और आइस बर्ग हैं, जो पूरी पृथ्वी पर ताजे जल के स्रोत हैं।

जल की निरंतर कमी होने के कारण जो 1947 में एनुअल पर कैपिटा 6042 क्यूबिक मीटर हुआ करती थी अब लगातार घटती जा रही है तथा आने वाले समय में माना जा रहा है कि 2050 तक यह एनुअल पर कैपिटा घटकर 1140 क्यूबिक मीटर हो जाएगी, जिससे देश की एक बड़ी आबादी को पानी की कमी होने के कारण जल संकट का सामना करना पड़ेगा।

पानी की कमी होने के क्या कारण है ?

जलवायु परिवर्तन से लेकर, जल प्रदूषण तक ऐसे कई कारण है, जिससे देश में पानी का संकट बढ़ा है, इसमें कुछ प्रमुख कारण निम्न है-

♦  हरित क्रांति

♦  इंडस्ट्रियल उपयोग

♦  जल का आपर्याप्त रेगुलेशन

भारत सरकार द्वारा उठाये गए कदम :

भारत सरकार ने इस गंभीर समस्या को देखते हुए कई स्टेप उठाएं हैं, जिससे भूमिगत जल को रिचार्ज, जल की गुणवत्ता तथा जल को प्रदूषित होने से बचाया जा सके। इसमें कई स्कीम चलायी गयी है, जो निम्न है-

♦ अटल भूजल योजना

♦  जल शक्ति अभियान

♦ अटल मिशन फॉर रिजूवनशन एंड ट्रांसफॉरमेशन

♦ नेशनल गंगा रिवर बेसिन अथॉरिटी (NGRDA)

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