कैसे काम करेगा देश का पहला ई-हाईवे | India’s first E-Highway

ByShubham Maurya

Jul 16, 2022
HTOA

देश को जल्द ही पहला इलेक्ट्रिक हाईवे (E-Highway) मिल सकता है। हाल ही में Hydraulic Trailer Owners Association (HTOA) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान परिवहन मंत्री श्री नितिन गडकरी ने नई घोषणा की है, उन्होंने कहा सरकार दिल्ली से मुंबई के बीच एक इलेक्ट्रिक हाईवे बनाने की योजना पर विचार कर रही है, पूरी तरह से तैयार होने के बाद यह देश का पहला ई-हाईवे होगा ।

हालांकि इससे पहले भी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने दिल्ली से जयपुर के बीच इलेक्ट्रिक हाईवे बनाने की बात कही थी, यह अभी भी एक प्रस्तावित परियोजना है और इसके लिए प्रयास चल रहा है।

इलेक्ट्रिक हाईवे होता क्या है ?

साधारण शब्दों में एक ऐसा हाइवे जिस पर इलेक्ट्रिक वाहन चलते हो, जिस तरह ट्रेन बिजली के जरिए चलती है ठीक उसी तरह हाईवे पर भी बिजली के तार लगाए जाएंगे। हाईवे पर चलने वाले वाहनों को इन तारों के जरिए बिजली की आपूर्ति की जाएगी, इसे ही E-Highway यानी इलेक्ट्रिक हाइवे कहा जाता है।

ये इलेक्ट्रिक हाईवे काम कैसे करेगा ?

दुनिया भर में तीन अलग-अलग तरह की टेक्नोलॉजी, ई-हाईवे के लिए इस्तेमाल की जाती है-

पैंटोग्राफ मॉडल, कंडक्शन मॉडल और इंडक्शन मॉडल

इलेक्ट्रिक बस

पैंटोग्राफ मॉडलपैंटोग्राफ मॉडल में सड़क के ऊपर एक तार लगाया जाता है, जिसमें बिजली दौड़ती रहती है एक पेंटाग्राफ के जरिए इस बिजली को वाहन में सप्लाई किया जाता है, यह इलेक्ट्रिसिटी सीधे रूप से इंजन को पावर देती है या वाहन में लगी बैटरी को चार्ज करती है।

वर्तमान में भारतीय ट्रेनों में यही मॉडल इस्तेमाल में लाया जा रहा है क्योंकि भारत सरकार स्वीडन (Sweden) की कंपनियों से बात कर रही है इसलिए माना जा रहा है कि स्वीडन वाली टेक्नोलॉजी ही भारत में लाई जाएगी, स्वीडन में ही पैंटोग्राफ मॉडल का इस्तेमाल किया जाता है।

क्या है कंडक्शन मॉडल :

कंडक्शन मॉडल में सड़क के भीतर ही भीतर तार लगा होता है जिस पर पैंटोग्राफ टकराता हुआ चलता है, इसमें वाहन के पिछले हिस्से में पैंटोग्राफ लगा होता है जो सड़क पर बिछे बिजली के तार से ऊर्जा प्राप्त करता है।

क्या है इंडक्शन मॉडल :

इंडक्शन मॉडल में किसी तरह के तार का इस्तेमाल नहीं होता है, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक करंट के जरिए वाहन को बिजली की आपूर्ति की जाती है, इसका इस्तेमाल ज्यादा नहीं किया जाता है।

ई हाईवे के आने से फायदा क्या होगा ?

इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इससे वाहनों की आवाजाही पर आने वाले खर्च में भारी कमी हो सकती है-
एक आंकड़े के मुताबिक ई-हाईवे से लॉजिस्टिक कॉस्ट में 70% की कमी आएगी, मौजूदा वक्त में ट्रांसपोर्टेशन लागत का ज्यादा होना चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी में एक बड़ी वजह है, ऐसे में अगर ट्रांसपोर्ट लागत में कमी आएगी तो चीजें सस्ती हो सकती हैं।

यह पूरी तरह से इको फ्रेंडली होगा, वाहनों को चलाने के लिए इलेक्ट्रिसिटी का इस्तेमाल किया जाएगा, जो पेट्रोल डीजल के मुकाबले पर्यावरण के लिए कम हानिकारक होगी।

ई-हाईवे की राह में चुनौतियां :

तमाम फायदों के बावजूद विशेषज्ञों ने ई-हाईवे की राह में कुछ चुनोतियों कि ओर भी इशारा किया है-

इसमें सबसे बड़ी चुनौती इसके इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाने की है, इलेक्ट्रिक हाईवे को बनाने का खर्च आम रोड के मुकाबले ज्यादा आता है और इसमें समय भी ज्यादा लगता है।

ई-हाईवे की एक अन्य चुनोति यह भी है कि वर्तमान में भारत में पेट्रोल डीजल से चलने वाले वाहनों की संख्या काफी ज्यादा है, ऐसे में इन वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों से रिप्लेस करना एक मुश्किल काम होगा, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी बनाना अपने आप में एक जटिल टास्क है।

क्या ई- हाईवे पर कार व जीप जैसे निजी वाहन को भी चलाया जा सकेगा ?

स्वीडन व जर्मनी जैसे-यूरोपियन देशों में इनका इस्तेमाल मालवाहन के लिए ही किया जाता है, अतः इसका इस्तेमाल निजी वाहन के लिए भी किया जा सकता है।

निजी वाहन में इलेक्ट्रिसिटी की आपूर्ति कैसे की जाएगी ?

निजी वाहन इलेक्ट्रिसिटी से चलते हैं पर वह बैटरी की मदद से चलते हैं, सीधी सप्लाई केवल और केवल पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए इस्तेमाल हो रहे वाहनों में ही दी जाती है, निजी वाहनों के सुविधा के लिए इस हाईवे पर छोटी-छोटी दूरी पर चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे, जहां इन्हें चार्ज किया जा सकेगा।

भारतीय ट्रेनों में किस मॉडल का इस्तेमाल किया जाता है ?

वर्तमान में भारतीय ट्रेनों में पैंटोग्राफ मॉडल ही इस्तेमाल में लाया जा रहा है।पैंटोग्राफ मॉडल में सड़क के ऊपर एक तार लगाया जाता है, जिसमें बिजली दौड़ती रहती है एक पेंटाग्राफ के जरिए इस बिजली को वाहन में सप्लाई किया जाता है।

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