भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (forex reserves) $80 बिलियन गिर गया, बड़ा आर्थिक नुकसान | India’s forex reserves in hindi

ByShubham Maurya

Sep 20, 2022
India's forex reserve decline

हाल ही में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में भारी कमी आयी है, वर्तमान वर्ष में य $82.7 बिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर गिरा है तथा भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $3.6 बिलियन/सप्ताह के अनुसार लगातार गिर रहा है, जिससे भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (forex reserves) घटकर अब $550 बिलियन के आंकड़े पर पहुँच गया है।

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (forex reserves) क्यों गिर रहा है ?

पिछले दो सालों में देखा गया है कि भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार कमी आयी है, इसका मुख्य कारण रुपे को अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में गिरने से बचाना है, भारत सरकार डॉलर के लगातार मजबूत होने के कारण विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग करके रुपे की किमत को अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में कम होने से बचा रही है ताकि भारत को कच्चे तेल का निर्यात करने में आसानी हो और भारत में महंगाई ज्यादा ना बढ़े।

विदेशी मुद्रा भंडार (forex reserves) क्या होता है ? इसमें किन-किन देशों की मुद्राएँ शामिल है ?

विदेशी मुद्रा भंडार को इन्सोरेन्स कवर भी कहा जाता है क्योंकि यह किसी भी देश की अनिवार्यता है कि उसके पास पर्याप्त मात्रा में विदेशी मुद्रा भंडार (forex reserves) हो ताकि वह देश अपने आर्थिक संकट में इसका उपयोग कर सके। जिस देश का विदेशी मुद्रा भंडार जितना ज्यादा होता है, उस देश की अर्थव्यवस्था भी उतनी ही मजबूत होती है।
अगर हम उदहारण के लिए देखे तो भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका जिसमें आर्थिक आपातकाल घोषित कर दिया गया है ऐसा इसलिए क्योंकि उनके पास पर्याप्त मात्रा में विदेशी मुद्रा भंडार नहीं था, जिससे वह अपने देश की हालत में सुधार कर पाए।

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में निम्न घटकों को शामिल किया गया है

♦ फॉरेन करेंसी एसेट्स (डॉलर, यूरो, पाउंड, दिनार, रियाल)

♦ RBI गोल्ड (जिसको यूनिवर्सल स्वीकार किया जाता है)

IMF (इंटरनेशनल मोनेट्री फण्ड) SDR (स्पेशल ड्राइंग राइट्स)

IMF में रिज़र्व पैसा

1991 में भारत के पास सिर्फ $5-6 बिलियन का विदेशी मुद्रा भंडार था, जो वर्तमान में $550 बिलियन है। भारत सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $1 ट्रिलियन होगा, किसी भी देश का विदेशी मुद्रा भंडार जितना ज्यादा होता है, ग्लोबल निवेशकर्ता उस देश में निवेश करने के लिए ज्यादा आकर्षित होते है।

विदेशी मुद्रा भंडार (forex reserves) के उपयोग से भारत रुपे को अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में गिरने से कैसे बचाता है ?

अगर देखा जाये तो भारत अपनी जरुरत का 85% कच्चा तेल दूसरें देशों से आयात करता है, जिसकी पेमेंट हम डॉलर में करते है, जिसके लिए हमे पहले अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा बाज़ार से डॉलर को खरीदना पड़ता है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में रुपे की अधिकता हो जाती है और रुपे की किमत डॉलर के मुकाबले कम हो जाती है।

भारत में कच्चे तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट का आयात सबसे ज्यादा किया जाता है, जिससे हमारे देश की करेंसी अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा बाज़ार में ज्यादा होने के कारण रुपे की किमत लगातार कम होने लगती है, वर्तमान में जैसे-$1 की किमत 79.65 रुपे पहुंच गयी है और लगातार कम हो रही है तो इसको और गिरने से बचाने के लिए भारत सरकार विदेशी मुद्रा भंडार (forex reserves) का उपयोग करके अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा बाज़ार से अपने ही देश की करेंसी रुपे को खरीदती है ताकि इसकी सप्लाई अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा बाज़ार में कम हो सके और इसकी किमत को स्थिर रखा जा सके।

भारत सरकार अपनी निर्भरता को कम कर रही है :

भारत अपनी निर्भरता को कच्चे तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद पर लगातार कम कर रहा है इसलिए अपने सुना होगा कि गुजरात में भारत का ऐतिहासिक पहला सेमीकंडक्टर प्लांट ताइवान की मदद से लगने जा रहा है ताकि हम इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद को अपने ही देश में मैन्युफैक्चरिंग कर अपनी निर्भरता को कम कर सके।

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पिछले वर्ष भारत में $57 बिलियन के इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट का आयात किया गया था, उम्मीद है कि अब इस सेमीकंडक्टर प्लांट के लगने से हम अपने आयात को कम कर दूसरे देशों को निर्यात भी कर पाएंगे, जिससे भारतीय रुपया भी मजबूत हो पाए।

हालाँकि भारत के पास प्रयाप्त मुद्रा भंडार है, RBI (Reserve Bank Of India) ने कहा है कि हम 9 महीनों तक अपने देश के आयात को संभाल सकते है लेकिन भारत के विदेशी मुद्रा भंडार का गिरना चिंता का विषय है।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत और थाईलैंड सबसे ज्यादा अपने देश के विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल कर रहे है, अपने देश की करेंसी को गिरने से बचाने के लिए, अन्य देश भी भी ऐसा ही कर रहे है क्योंकि देखा जा रहा है कि पूरी दुनिया में आर्थिक मंदी के हालात बन गए है और डॉलर की सप्लाई कम होने के कारण इसकी किमत भी लगातार बढ़ती ही जा रही है जो चिंता का विषय है।

भारत सरकार लगातार अपनी निर्भरता को कच्चे तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट में कम कर रही है और मेक इन इंडिया को बढाकर “आत्मनिर्भर भारत” बनने की ओर अग्रसर है। भारत सरकार का लक्ष्य है कि भारत 2030 तक 50% नॉन फॉसिल फ्यूल एनर्जी का उपयोग करेगा, जिससे भारत की निर्भरता कच्चे तेल पर कम हो पाए।

इन सब प्रयासों के कारण भारत जो पूरे विश्व की सबसे तेज ग्रोथ वाली अर्थव्यवस्था भी बन गयी है, मेक इन इंडिया को बढाकर “आत्मनिर्भर भारत” को साकार कर अपना रास्ता खुद बनाएगा और भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में एक नयी पहचान दिलाएगा।

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सबसे ज्यादा विदेशी मुद्रा भंडार किस देश के पास है ?

वर्तमान में सबसे ज्यादा विदेशी मुद्रा भंडार (forex reserves) चीन $3,22 ट्रिलियन के पास है तथा भारत $550 बिलियन के साथ पूरे विश्व में 5वें नंबर पर है।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा बाज़ार (forex exchange) क्या है ? जहाँ पर अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा को बदला जाता है

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा बाज़ार का कोई हेडक्वार्टर नहीं है लेकिन इसके कई देशों जैसे-न्यूयॉर्क, लंदन, टोक्यो, सिडनी आदि में इसके ट्रेडिंग सेण्टर है, जहाँ पर पर कोई भी देश मार्केट रेट पर अपने देश की करेंसी को बदल सकता है।

भारत में रुपे को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा बाज़ार से कैसे बदला जाता है ?

RBI (Reserve Bank Of India) भारत के forex reserve को पहले अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा बाज़ार में लेकर जाता है फिर वहां से डॉलर को खरीदता है।

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (forex reserves) के घटने से क्या होगा ?

विदेशी मुद्रा भंडार को इन्सोरेन्स कवर भी कहा जाता है, ताकि वह देश अपने आर्थिक संकट में इसका उपयोग कर सके। जिस देश का विदेशी मुद्रा भंडार जितना ज्यादा होता है उस देश की अर्थव्यवस्था भी उतनी ही मजबूत होती है।