International UPI क्या है ? क्या ये International Payment System SWIFT का एक विकल्प बन पायेगा ?

ByShubham Maurya

Jul 7, 2022
International UPI क्या है

भारत अपनी सबसे बड़ी कमजोरी International Payment System SWIFT को International UPI (Unified Payment Inerface) के माध्यम से दूर कर रहा है। Russia के साथ जो हुआ भारत नहीं चाहता कि वो उसके साथ हो, western country ने Russia पर जो Economical sanctions लगाये है, और उसे SWIFT Payment System से बाहर कर दिया है, जिसका Russia की Economy पर बहुत ही बुरा असर पड़ा है।

भारत Remittance Recipient के मामले में पूरे वर्ल्ड में No.1 है- Remittance क्या है ?

भारत से बाहर की दुसरे देशों से आयी हुई पेमेंट अगर रूक गयी, तो भारत को हर साल कई बिलियन डॉलर का नुकसान होगा, क्योंकि भारत Remittance Recipient के मामले में पूरे वर्ल्ड में No.1 है।
भारतीय जब भारत से बाहर जाकर UAE, U.S. (यूएस), Saudi Arab, (सऊदी अरब) या किसी भी देश में काम करके पैसा भारत में वापस भेजते हैं, तो भारत में उसको Remittance (रेमिटेंस) कहते हैं।
भारत में वित्तीय वर्ष 2021-2022 में $89 billion dollar के रेमिटेंस भेजे गए थे, कोई भी country इस अमाउंट के आसपास भी नहीं आता, भारत अपनी खुद की International UPI की तैयारी कर रहा है, अगर वेस्टर्न कंट्री ने इंडिया पर सैंक्शन लगा दिया तो हमारे लोग बहुत बुरा फंस जाएंगे वह अपने देश में पैसा भेज ही नहीं पाएंगे और अपनी फैमिली को सपोर्ट नहीं कर पाएंगे, यह भारत के लिए एक विशालकाय इकोनॉमिक डिजास्टर होगा।

भारत ने इसी से बचने के लिए SWIFT (स्विफ्ट) का अल्टरनेटिव बनाना शुरू कर दिया है, NPCI (एनपीसीआई) नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने UPI को अब डिसाइड कर लिया है कि यह इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन करने का एक सोर्स बनाएंगे जिससे आराम से भारत के बाहर जो भारतीय काम कर रहे हैं, वह इंटरनेशनल यूपीआई के माध्यम से भारत में पेमेंट कर पाए पाएंगे।

International UPI के फायदे क्या है- क्या ये International Payment System को revolutionize कर पायेगा ?

एक भारतीय होने के कारण कितने गर्व की बात है कि आप भारत के बाहर काम कर रहे हैं, लेकिन आप इंडियन टेक्नोलॉजी यूज़ कर पाएंगे और अपने पैसे भारत में भेज पाएंगे।

इससे सरकार के पास Data भी आ पाएगा, सरकार समझ पाएगी- कैसे ट्रांजैक्शन होते है, कितना रेमिटेंस भारत में आ रहा है। जिससे money laundering को भी रोका जा सकेगा, सरकार के पास Data होगा कितना पैसा और कहाँ से आ रहा है।

इसका सबसे बड़ा एडवांटेज यह है कि कल को हमें कोई ब्लैकमेल नहीं कर पाएगा सिर्फ ट्रांजैक्शंस को लेकर भारत के पास अपना इंटरनेशनल यूपीआई होगा।

यूपीआई टेक्नोलॉजी को दूसरे देशों के साथ MOU (Memorandum of Understanding) साइन करके, दूसरे देश भी इस टेक्नोलॉजी का यूज कर सकते हैं।

International UPI के सामने चुनोतिया –

जब आप UPI को इतना सक्षम बना लेते हैं कि आप बाहर से भारत में पैसा भेज रहे हैं, तो हमको यह भी सुनिश्चित करना होगा कि गलत लोग इस Technology का फायदा ना उठा पाए, तो भारत सरकार के लिए महत्वपूर्ण है कि जो भी इस Technology का यूज कर रहा है, उसका प्रॉपर KYC किया जाए ताकि गलत तरीके से इसका इस्तेमाल ना हो पाए।

क्या UPI International हो पायेगा ? इसको Internationalized करने के लिए क्या करना पड़ेगा ?

UPI को International करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह है कि हमको कई Country के साथ Agreement करने होंगे, जहां पर भारतीय जाते है और बहुत सारा Remittance भारत में भेजते है. जैसे-USA के साथ UPI Transaction को लेकर Agreement करना होगा। बहुत सी कंपनी से बातचीत की जा रही है कि हम ऐसा System बना पाये, जिससे हम आराम से International UPI के माध्यम से Payment कर सके।
International Payment System के लिए अभी सिर्फ 7 countries ही लिस्ट में शामिल है, इसको हमे कम से कम 25 से 30 countries और उससे भी ज्यादा करना होगा, तभी हम UPI को International बना पाएंगे।

MOU sign Country

भारत की Finance Minister निर्मला सीतारमण ने Tweet किया है कि दुनिया बात कर रही है- Web 3.0, ब्लॉकचेन की लेकिन भारत Cryptocloud से भी आगे निकल रहा है।
“India’s UPI is beating blockchain in the Payment Game.”

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Finance Minister Tweet