राष्ट्रीय लोजिस्टिक्स नीति 2022 क्या है ? | National Logistics Policy in hindi 

ByShubham Maurya

Sep 23, 2022
national logistic policy 2022 in hindi

हाल ही में भारत सरकार ने राष्ट्रीय लोजिस्टिक्स नीति ( National Logistics Policy) 2022 की शुरुआत की है, यह नीति भारत के भविष्य की नींव रखने जा रही है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि इस नीति को बनाने में 8 साल की मेहनत, रिसर्च और पूरी दूनिया के स्टडी पैटर्न को समझकर उसके हिसाब से भारत ने अपनी राष्ट्रीय लोजिस्टिक्स नीति बनायीं है, जिसका उद्देश्य देश में लोजिस्टिक्स से सम्बंधित सभी चुनौतियों को समाप्त करना है तथा 2030 तक भारत में लोजिस्टिक्स कॉस्ट को कम कर अपनी जीडीपी का 10% तक लाना है।

“लोजिस्टिक्स” क्या होता है ?

लोजिस्टिक्स को किसी भी देश के विकास कार्यों की नींव कहा जाता है, लोजिस्टिक्स से तात्पर्य किसी देश के द्वारा बनाये गए उत्पाद को उसके अंतिम बिंदु तक पहुँचाने में कितना समय, कितने संसाधन तथा उनके नियोजन, समन्वय उसके भण्डारण के सभी पहलूओं को ध्यान में रखा जाता है।

अतः लोजिस्टिक्स का मतलब उस देश में उपलब्ध इंफ्रास्ट्रक्चर से है, जिसमें सड़क मार्ग, रेलवे मार्ग, वायु मार्ग आदि का उपयोग करके कितने कुशल तरीके से हम अपने सामान को एक स्थान से उसके अंतिम बिंदु तक पहुंचाते है।

National Logistics Policy की भारत को जरुरत :

भारत के ई-कॉमर्स और इंडस्ट्री के राज्यमंत्री ने कहा है कि भारत में बेकार लोजिस्टिक्स के कारण हर साल भारत को अपनी जीडीपी का 14-16% तक आर्थिक नुकसान होता है, जो लगभग $65 बिलियन है जो कि बहुत ही चिंता का विषय है।
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि भारत में लोजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर उतने विकसित नहीं है जैसे- रेल फ्रेट नेटवर्क, कच्चे-माल को स्टोर करना, एक्सप्रेसवे की कमी, ट्रांसफॉर्मेशन काफी धीरे है, सप्लाई चैन की कमी है, भारत का टैक्सेशन सिस्टम बहुत ही काम्प्लेक्स है और ऐसी अन्य समस्याओं के कारण भारत का लोजिस्टिक्स नुकसान बढ़कर अ $80-90 बिलियन तक पहुँच गया है, इस राष्ट्रीय लोजिस्टिक्स नीति के आने से इसमें काफी सुधार होगा।

लोजिस्टिक्स के क्षेत्र में विकसित देशों की स्थिति :

वर्ल्ड बैंक देशों के लोजिस्टिक्स परफॉरमेंस को देखने के लिए, लोजिस्टिक्स परफॉरमेंस इंडेक्स जारी करता है जिसमें यह देखा जाता है कि उस देश का लोजिस्टिक्स कितना व्यवस्थित है।
इस इंडेक्स में पहला स्थान जर्मनी का है, इसी कारण जर्मनी को पूरे यूरोप की मुख्य अर्थव्यवस्था माना जाता है, जहाँ पर प्रोडक्ट के मैन्युफैक्चरिंग से लेकर उसको स्टोर, ट्रांसपोर्टेशन के विभिन्न मार्ग जैसे-रेल, जल मार्ग आदि बहुत ही विकसित है, जिससे जर्मनी में लोजिस्टिक्स कॉस्ट सबसे कम आती है। इस इंडेक्स में भारत का स्थान 44 है, अगर हम चाइना को देखे तो उसका 26वा स्थान है तथा अमेरिका की 14 रैंक है।

लोजिस्टिक्स कॉस्ट के ज्यादा होने से क्या असर पड़ता है ?

भारत में वर्तमान लोजिस्टिक्स कॉस्ट जो 14-16% है, जिससे दूसरे देशों की कंपनी अगर भारत में किसी प्रोडक्ट की मैन्युफैक्चरिंग करती है तो उत्पादन लागत बढ़ जाएगी जिसके कारण उस कंपनी को काफी नुकसान होगा और वो कंपनी भारत में निवेश करना नहीं चाहेगी।

National Logistics Policy, 2022 बनाने का मुख्य कारण :

भारत ने लक्ष्य रखा है कि भारत 2030 तक अपनी जीडीपी के 10% तक लोजिस्टिक्स कॉस्ट को लेकर आएगा, जिससे भारत में उत्पादन लागत कम हो पाए। अगर हम चाइना को देखे तो वहां पर हाल ही में एक बहुत बड़ी सरकारी कंपनी बनायीं गयी है, जिसका काम सिर्फ लोजिस्टिक्स में सुधार करना है जिसके द्वारा चाइना के रेल नेटवर्क, जल नेटवर्क और सभी पोर्ट्स को एक में मिला दिया गया है ताकि लोजिस्टिक्स बहुत तेज हो पाए।

इसके रेस्पोंस में भारत ने भी इस क्षेत्र में बहुत तीव्र गति से काम करना शुरू कर दिया है, भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि National Logistics Policy से पहले भारत ने जो भी स्टेप लिए है, जैसे-सागरमाला– जिसके अंतर्गत भारत में बने पोर्ट्स तथा नदियों को आपस में जोड़ा जाएगा ताकि ट्रांसपोर्टेशन को सस्ता और सुविधाजनक बनाया जा सके।

भारतमाला प्रोजेक्ट-इस प्रोजेक्ट के द्वारा भारत में बने सड़कों के इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार, उच्च गुणवत्ता वाले नेशनल हाईवे, नये एक्सप्रेसवे को बनाया जाएगा, जिससे National Logistics Policy को भी सपोर्ट मिलेगा।

गतिशक्ति– प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि National Logistics Policy को सबसे ज्यादा सपोर्ट गतिशक्ति से ही मिलेगा क्योंकि इसके अंतर्गत 100 लाख करोड़ से भी ज्यादा का निवेश भारत में किया जाएगा और देश के राज्य/ केंद्रशाशित प्रदेशों की इकाइयों को एक साथ जोड़ दिया गया है, जिसके अंतर्गत सभी विभाग एक साथ मिलकर काम करना भी शुरू कर चुके है। इन सब प्रयासों के कारण भारत में जो कंटेनर विस्सेल का टर्न अराउंड टाइम जो 44 घंटे होता था अब घटकर 26 घंटे हो गया है।

National Logistics Policy को लागू करने के चार चरण :

भारत के लोजिस्टिक्स को बेहतर करने के लिए भारत सरकार ने National Logistics Policy के अंतर्गत चार बड़े स्टेप लिए है-

1-इंटीग्रेशन ऑफ़ डिजिटल सिस्टम (IDS) :-इसमें सात विभिन्न डिपार्टमेंटस (सड़क, ट्रांसपोर्ट, कस्टम्स, रेलवे, एविएशन, फॉरेन ट्रेड और कॉमर्स मिनिस्ट्री ) सबकों एक में मर्ज कर दिया जायेगा, जिससे सरकार को लोजिस्टिक्स संभालनें में आसानी हो सके।

2-यूनिफाइड लोजिस्टिक्स इंटरफ़ेस प्लेटफार्म (ULIP ) :- इस प्लेटफार्म को अभी बनाया जाएगा, जिसके बनने पर कंपनी को पता चल सकेगा की उनका शिपमेंट कहाँ से कहाँ जा रहा है और उनकी रियल टाइम में ट्रैकिंग भी कर पाएंगे।

3-ईज ऑफ़ लोजिस्टिक्स (EOL) :-यह भारत सरकार द्वारा लांच अलग से एक प्लेटफार्म बनाया गया है, जिसकी एक वेबसाइट भी है, जहाँ पर लोजिस्टिक्स के नियमों को आसानी से समझाया जाएगा और निर्यात से सम्बंधित सभी जानकारी को पूर्ण रूप से प्रदर्शित भी किया जाएगा।

Ease of logistics

4-सिस्टम इम्प्रूवमेंट सिस्टम (SIS) :-यह सिस्टम भारत सरकार द्वारा बनाये गए लोजिस्टिक्स की देखरेख करेगा तथा समय-समय पर उसमें वर्तमान जरुरत के हिसाब से उसमें सुधार भी किया जायेगा।

अतः भारत के लिए यह National Logistics Policy बहुत ही महत्वपूर्ण साबित होगी, जिसमे 2030 तक भारत के लोजिस्टिक्स कॉस्ट को जीडीपी के 10% तक लाकर जो भारत के मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मजबूत बनाएगा, जिससे लोकल बिज़नसमैन को भी बढ़ावा मिल पाएगा और भारत विकसित देश बनने की राह में एक कदम और बढ़ाएगा।

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